क्रिप्टोक्यूरेंसी निवेश

मासिक लाभ गणना

मासिक लाभ गणना
डाकघर की इस योजना में कर सकते हैं 1000 से लाखों रुपये तक का निवेश, हर महीने मिलता है पैसा (File Photo)

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सबसे कम मासिक भुगतान कैसे मिलता है?

हम आपके बजट के साथ काम करते हैं कि प्रत्येक योग्य आवेदक को अपनी वित्तीय स्थिति के आछार पर आपकी मदद कर सके

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  • बैंक विवरण (3 महीने)
  • टैक्स रिटर्न (2 वर्ष)
  • वाणिज्यिक ड्राइविंग लाइसेंस
  • एसएस कार्ड की कॉपी
  • संघीय आईडी (स्थायी निवासी कार्ड, आदि)
  • मोटर कैरियर लीज समझौते (यदि लागू हो)

Panorama of heavy-dutytrucks in truck yard


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पीपीएफ बैलेंस पर ब्याज की गणना ऐसे कर सकते हैं आप

सितंबर 2018 तिमाही के लिए केंद्र सरकार ने PPF पर 7.6 फीसदी ब्याज देने का फैसला किया है.

पीपीएफ बैलेंस पर ब्याज की गणना ऐसे कर सकते हैं आप

PPF के नियमों के मुताबिक निवेश के इस विकल्प में आपके जमा पर हर महीने ब्याज की गणना की जाती है. ब्याज आपके PPF अकाउंट में हालांकि हर साल के अंत में जोड़ा जाता है.

अगर आपने किसी महीने में पांच तारीख से पहले रकम डाली है तो आपको उस महीने का भी ब्याज मिलता है. किसी एक वित्त वर्ष में आप कम से कम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये का निवेश PPF अकाउंट में कर सकते हैं.

यहां हम आपको बता रहे हैं कि आपके मासिक या एकमुश्त योगदान पर PPF में ब्याज की गणना किस तरह की जाती है.

मासिक योगदान
मान लेते हैं कि आपने PPF अकाउंट में हर महीने 12,500 रुपये का योगदान किया. इसके साथ ही यह भी मान लेते हैं कि साल 2017-18 में इस निवेश पर ब्याज दर 7.6 फीसदी रही है.

इसके बाद ब्याज की गणना इस तरह की जाएगी.

PPF1

साल 2017-18 के लिए आपके पीपीएफ खाते पर ब्याज की रकम 5,858.33 रुपये होगी. अगर आपने PPF अकाउंट में यह रकम हर महीने पांच तारीख से पहले डाली होती तो आपको ब्याज के रूप में 316.67 रुपये अधिक मिलते.

एकमुश्त योगदान
अगर आपने किसी वित्त वर्ष में PPF अकाउंट में एकमुश्त निवेश किया है तो उस पर ब्याज की गणना इस तरह की जाएगी.

PPF2

एकमुश्त निवेश के मामले में भी अगर आपने पहली बार निवेश उस महीने में पांच तारीख के बाद किया होता तो आपको एक महीने का ब्याज कम मिलता. इस स्थिति में आपको ब्याज के रूप में करीब 950 रुपये का नुकसान होता.

क्या ध्यान रखें?
PPF में निवेश के वक्त आपको यह भी ध्यान रखना है कि एक साल में आप इस खाते में 12 बार से अधिक निवेश नहीं कर सकते.

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छुट्टी की कटौती में उतार-चढ़ाव की प्रवृत्ति होती है, सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की गणना में विचार नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

छुट्टी की कटौती में उतार-चढ़ाव की प्रवृत्ति होती है, सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की गणना में विचार नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने पाया कि पति की मासिक आय में से उसके द्वारा ली गई कुछ छुट्टियों के कारण कटौती सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की गणना में आधार रेखा का हिस्सा नहीं बन सकती, क्योंकि सभी संभावना में समय के साथ इसमें उतार-चढ़ाव होगा।

उसी पर विचार करते हुए अदालत ने पति के इस दावे को खारिज कर दिया कि उसके आयकर दस्तावेजों में उसकी कुल मासिक आय की गणना परिवार अदालत द्वारा गलत तरीके से की गई और गैर को देय मासिक भरण-पोषण की अंतिम राशि पर पहुंचने के दौरान कुछ वैधानिक कटौती को ध्यान में रखा गया।

पति-आवेदक ने हाईकोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए वर्तमान आवेदन को प्राथमिकता दी, जिसने फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और आवेदक द्वारा गैर-आवेदकों को देय भरण-पोषण राशि पत्नि को 50,000/- रुपये से 75,000/- रुपये और और उनके नाबालिग बेटे को 20,000/- से रुपये से 25,000 / - रुपये कर दिया गया।

डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने पति की अर्जी खारिज करते हुए कहा,

"यह दावा किया गया कि आवेदक-पति की कुल मासिक आय की गलत गणना की गई और गैर-आवेदक/पत्नी को देय मासिक भरण-पोषण की अंतिम राशि की गणना करते समय कुछ वैधानिक कटौतियों को ध्यान में रखा गया। हालांकि, इस तथ्य के मद्देनजर स्वीकार नहीं किया जा सकता कि आवेदक-पति ने कुछ छुट्टियों का लाभ उठाया, जिसके कारण उसकी मासिक आय से कुछ कटौती की गई। ऐसी कटौती भरण-पोषण की गणना में आधार रेखा का हिस्सा नहीं बन सकती, क्योंकि सभी संभावना है, कई कारणों से समय के साथ इसमें उतार-चढ़ाव होगा।"

अदालत ने यह देखा कि पत्नी को भरण-पोषण देने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शादी के दौरान पत्नी द्वारा आनंदित जीवन स्तर, विवाह के समाप्त होने के बाद भी पति द्वारा बनाए रखा जाए। अदालत ने कहा कि प्रत्येक मामले के आसपास के तथ्यों और परिस्थितियों को देखने के बाद इस तरह का विचार किया जाता है।

अदालत ने कहा कि आक्षेपित निर्णय स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि पत्नी की आय लगभग 85,000/- रुपये प्रति माह भरण-पोषण के अनुदान के दौरान पहले से ही स्पष्ट रूप से विचार किया गया। यह भी देखा गया कि पति की यह दलील कि पत्नी माता-पिता के अलगाव की दोषी है, वर्तमान मुकदमे का विषय नहीं हो सकता।

अदालत ने यह भी कहा कि आक्षेपित निर्णय की समीक्षा का दायरा मौजूद है और यह उसके अधिकार क्षेत्र में है। मामले में संजीव कपूर बनाम चंदना कपूर और अन्य (2020) 13 एससीसी 172 पर भरोसा किया गया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने माना कि सीआरपीसी की धारा 362 के तहत बार में सीआरपीसी की धारा 125 के संबंध में ढील दी गई और उसी के संबंध में पारित निर्णय को बदल दिया जा सकता है या उन परिस्थितियों के कारण उस पुनर्विचार किया जा सकता है, जो बाद में बदल सकती हैं।

एडवोकेट प्रभजीत जौहर, एडवोकेट रोज़मेरी राजू और एडवोकेट पुष्कर तैमनी आवेदक की ओर से पेश हुए जबकि एडवोकेट प्रतिवादियों की ओर से परवेज मोयल उपस्थित हुए।

कर्मचारी को देय पेंशन की गणना

पेंशन की गणना कर्मचारी को सेवानिवृत्त के समय देय परिलब्धियों व पूर्ण की गई पेंशन योग्य (अर्हकारी) सेवा अवधि के आधार पर की जाती है । यहाँ यह उल्लेखनीय है कि नियमानुसार सेवा निवृत्ति पर कम से कम 10 वर्ष की पेंशन योग्य सेवा पूर्ण करने पर ही मासिक पेंशन की देयता बनती है । 10 वर्ष से कम की पेंशन योग्य सेवा होने पर केवल एकमुश्त सेवा उपदान (Service Gratuity) ही नियमानुसार देय है ।

विभिन्न प्रकार की पेंशनों जैसे अधिवार्षिकी, सेवा निवृत्ति (Retiring), असमर्थता व क्षतिपूरक पेंशन आदि के मामलों में पेंशन की देयता को निम्न भागों में विभक्त किया जा सकता है :-

(क) 33 वर्ष मासिक लाभ गणना या इससे अधिक अवधि की सेवा पूर्ण करने पर देय पेंशन (30.6.2013 तक) ।

(ख) दिनांक 1.7.2013 व इसके पश्चात सेवा निवृत्त होने वाले राज्य कर्मचारियों के मामले में 28 वर्ष या इससे अधिक पेंशन योग्य सेवा पूर्ण करने पर प्राप्त परिलब्धियों की 50 प्रतिशत पेंशन देय होने का प्रावधान किया गया है।

(ग) 28 वर्ष से कम किन्तु 10 वर्ष या इससे अधिक की सेवा पूर्ण करने पर देय पेंशन

(घ) 10 वर्ष से कम अवधि की सेवा पूर्ण होने पर देय एक मुश्त पेंशन अनुलाभ

(क) 30.6.2013 तक सेवानिवृत्त कर्मचारी को 33 वर्ष का अर्हक सेवा करने पर वेतन का 50 प्रतिशत

(ख) 1.7.2013 व इसके पश्चात 28 वर्ष या अधिक अवधि की सेवा पूर्ण करने पर देय मासिक पेंशन

उपरोक्त मामलों में सेवानिवृत्ति से ठीक पूर्व कर्मचारी की परिलब्धियों (दिनांक 1.9.2006) से राज्य में अधिकतम वेतन सीमा 77,000 थी जो दिनांक 1.1.2016 से 2,18,000 हो गई हैं) के 50 प्रतिशत के बराबर मासिक पेंशन देय होगी । उदाहरणार्थ यदि परिलब्धियां 80,200 प्रतिमाह हों तो मासिक लाभ गणना पेंशन 50 प्रतिशत अर्थात् 40,100 प्रतिमाह होगी ।

(ग) 1.7.2013 व इसके पश्चात सेवानिवृत्त होने वाले राज्य कर्मियों की 28 वर्ष से कम किन्तु 10 वर्ष या अधिक अवधि की पेंशन योग्य सेवा पूर्ण करने पर

इस प्रकार के मामले में पेंशन की गणना कर्मचारी द्वारा की गई सेवा के अनुसार बिन्दु “क” के अधीन स्वीकार 50 प्रतिशत राशि के अनुपात में अधिकृत होगी । उदाहरणार्थ बिन्दु ख के अनुसार यदि परिलब्धियां 80,200 ही हैं किन्तु सेवाएं 22 वर्ष की हैं तो अनुपातिक पेंशन 80,200/2×44/56-31,508 रूपये प्रति माह होगी क्योंकि 22 वर्ष में 6 माह के 44 खण्ड होते हैं। इस प्रकार पेंशन गणना का फार्मूला निम्न प्रकार है :

01.01.मासिक लाभ गणना 2016 को या इसके पश्चात सेवानिवृत्त कर्मी के लिए गणना करने पर पेंशन/पारिवारिक पेंशन यदि 8850 से कम आती है तो न्यूनतम पेंशन 8850 प्रतिमाह देय होगी।

दिनांक 1.9.1996 से न्यूनतम पेंशन /पारिवारिक पेंशन 1275 थी। दिनांक 1.7.2004 से मूल वेतन में 50 प्रतिशत मंहगाई भत्ता (डी.ए.) वेतन में मंहगाई वेतन के रूप में समाहित करने पर न्यूनतम पेंशन /पारिवारिक पेंशन 1913 हो गई तथा दिनांक 1.01.2006 से पुनरीक्षित वेतनमान 2008 लागू होने पर न्यूनतम पेंशन/पारिवारिक पेंशन 3025 प्रतिमाह कर दी गई है जिसका नगद लाभ दिनांक 1.1.2007 से देय रहा है। 1.7.2013 से न्यूनतम पेंशन/पारिवारिक पेंशन 3450 प्रतिमाह थी जो 1.1.2016 से 8850 हो गयी (नगद लाभ .1.2017 से देय)

राज्य सरकार ने संशोधित वेतनमान नियम क F.12(6)FD/Rules/2017 दिनांक 30.10.2017 से जारी किये । जिन्हें 1.10.2017 से लागू किया गया था। पुनः समसंख्यक आदेश दिनांक 9.12.2017 से इन्हें 1.1.1016 से लागू किया गया । दिनांक 1 .1 .2016 से 31.12.2016 तक की अवधि का कोई एरियर भुगतान देय नहीं है । अर्थात नकद लाभ दिनांक 1.1.2017 से ही देय होगा ।

वेतन की अधिकतम सीमा 2,18,600/- दिनांक 1.1.2016 से लागू मानी गई है।

(घ) 10 वर्ष से कम अवधि की सेवा होने पर देय एक मुश्त सेवा उपदान :

यदि कोई राज्य कर्मचारी 10 वर्ष की पेंशन योग्य सेवा पूर्ण करने के पूर्व ही निहित प्रावधानों के तहत सेवा निवृत्त हो जाता है तो उसे मासिक पेंशन देय नहीं होगी बल्कि केवल एक मुश्त राशि सेवा उपदान के रूप में देय होगी जो प्रत्येक छ: माह की सेवा अवधि के लिए आधे माह की परिलब्धि की दर से संगणित की जायेगी। (नियम 54(1)

डाकघर की इस योजना में कर सकते हैं 1000 से लाखों रुपये तक का निवेश, हर महीने मिलता है पैसा

डाकघर मासिक आय योजना (पीओएमआईएस) की ब्याज दर अब 6.6% प्रति वर्ष है, जो मासिक देय है। कम से कम 1000 रुपया इसमें निवेश किया जा सकता है, जबकि मासिक लाभ गणना अधिकतम आप 4.5 लाख से अधिक का भी निवेश कर सकते हैं।

डाकघर की इस योजना में कर सकते हैं 1000 से लाखों रुपये तक का निवेश, हर महीने मिलता है पैसा

डाकघर की इस योजना में कर सकते हैं 1000 से लाखों रुपये तक का निवेश, हर महीने मिलता है पैसा (File Photo)

डाकघर के तहत कई ऐसी योजनाएं हैं, जिसमें निवेश करके लोगों को फायदा मिल सकता है। डाकघर की हर दिन, महीने व वर्ष के निवेश के लिए आरडी योजना, सुकन्‍या समृधि योजना या फिर बचत खाता की योजनाएं हों, ये सभी निवेश का अच्‍छा माध्‍यम मानी जाती हैं और यह सबसे विश्‍वसनीय भी होती हैं। इन योजनओं में निवेश करने पर अलग -अलग ब्‍याज दर से लाभ मिलता है। ऐसी ही योजनओं में से एक डाकघर मासिक आय योजना (POMIS) है।

इस योजना में आप एक निश्चित राशि का निवेश कर सकते हैं और आप एक निश्चित ब्याज भी ले सकते हैं, जिसकी गणना हर महीने के हिसाब से की जाती है। इस योजना के तहत आप अपनी छोटी-छोटी जरुरतों को भी पूरा कर सकते हैं, साथ ही यह आपको हर महीने धनरा‍शि देने के लिए उपयोगी है। इस योजना के तहत आप निवेश कर मासिक आय के तौर पर इसका उपयोग कर सकते हैं।

डाकघर मासिक आय योजना (पीओएमआईएस) की ब्याज दर अब 6.6% प्रति वर्ष है, जो मासिक देय है। कम से कम 1000 रुपया इसमें निवेश किया जा सकता है, जबकि अधिकतम आप 4.5 लाख से अधिक का भी निवेश कर सकते हैं। लेकिन वहीं अगर आपके पास संयुक्‍त खाता है तो आप 9 लाख तक का निवेश कर सकते हैं। इस योजना के अंतर्गत मासिक ब्‍याज मासिक लाभ गणना किसी भी सीबीएस डाकघर में बचत खाते में जमा किया जा सकता है।

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इसमें 5 वर्ष की लॉक-इन अवधि दी जाती है और 1 वर्ष से पहले आप अपनी जमा राशि वापस नहीं ले सकते। हालाकि खाता 1 वर्ष के बाद और 3 वर्ष से पहले बंद हो जाता है, तो मूलधन से 2% की कटौती कर ली जाती है और शेष राशि का भुगतान किया जाएगा। यदि आप 3 साल बाद और 5 साल से पहले खाता बंद करते हैं, तो मूलधन से 1% की कटौती की जाएगी। पूर्ण निवेश से पहले अगर खाताधारक की मृत्यु हो जाती है, तो खाता बंद किया जा सकता है और राशि नामांकित परिवार के सदस्‍य को दी जाएगी।

डाकघर मासिक आय योजना (POMIS) के लिए खाता आसानी से खोला जा सकता है। इस योजना के तहत 10 साल से उपर का नाबालिग भी खाता खोल सकता है। इस योजना में खाता खोलने के लिए डाकघर की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर फॉर्म भरना होगा या आप नजदीकी डाकघर में जाकर भी खाता खोल सकते हैं।

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