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एएसआई संकेतक

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अयोध्या मुद्दा : 70 साल बाद आया फैसला, मंदिर वहीं बनेगा

नई दिल्ली, 9 नवंबर (एजेंसी)| अयोध्या विवाद मामले में 70 सालों तक चली कानूनी लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट में 40 दिनों तक लगातार चली सुनवाई के बाद शनिवार को ऐतिहासिक फैसला आ गया। फैसला विवादित जमीन पर रामलला के हक में सुनाया गया।

फैसले में कहा गया कि राम मंदिर विवादित स्थल पर बनेगा और मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में पांच एकड़ जमीन अलग से दी जाएगी। अदालत ने कहा कि विवादित 02.77 एकड़ जमीन केंद्र सरकार के अधीन रहेगी। केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को मंदिर बनाने के लिए तीन महीने में एक ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया गया है।

राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने निर्मोही अखाड़ा और शिया वक्फ बोर्ड के दावों को खारिज कर दिया, लेकिन साथ ही कहा कि निर्मोही अखाड़े को ट्रस्ट में जगह दी जाएगी।

अदालत ने बाबरी मस्जिद विध्वंस पर कहा कि मस्जिद को गिराना कानून का उल्लंघन था। इसके साथ ही अदालत एएसआई संकेतक ने कहा कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी। एएसआई के मुताबिक मंदिर के ढांचे के ऊपर ही मस्जिद बनाई गई थी।

प्रधान न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आस्था के आधार पर फैसले नहीं लिए जा सकते हैं। हालांकि यह विवाद सुलझाने के लिए संकेतक हो सकता है। अदालत को लोगों की आस्था को स्वीकार करना होगा और संतुलन बनाना होगा। अदालत ने कहा कि रामजन्मभूमि कोई व्यक्ति नहीं है, जो कानून के दायरे में आता हो।

राम चबूतरा और सीता रसोई का अस्तित्व किया स्वीकार

अदालत ने पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट पर भरोसा जताते हुए कहा कि इस पर शक नहीं किया जा सकता। पुरातत्व विभाग की खोज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में राम चबूतरा और सीता रसोई में पूजा हुआ करती थी। इसके सबूत हैं कि हिंदुओं के पास विवादित जमीन के बाहरी हिस्से पर कब्जा था।

अदालत ने माना कि हिंदू इसे भगवान राम की जन्मभूमि मानते हैं। मुस्लिम इसे मस्जिद कहते हैं। हिंदुओं का मानना है कि भगवान राम केंद्रीय गुंबद के नीचे जन्मे थे। यह व्यक्तिगत आस्था की बात है। अदालत ने कहा कि अयोध्या में राम के जन्म का किसी ने विरोध नहीं किया है।

नई मस्जिद के निर्माण के लिए अलग जमीन दी जाए

कोर्ट ने फैसले में कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को नई मस्जिद के निर्माण के लिए अलग जमीन दी जाए। अदालत ने कहा कि या तो केंद्र सरकार अयोध्या में अधिग्रहित जमीन में से सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन दे या फिर उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या शहर में कहीं एएसआई संकेतक और मुस्लिम पक्ष को जमीन दे।

अदालत ने जहां विवादित जमीन रामलला विराजमान को दिया, वहीं सुन्नी वक्फ बोर्ड को जमीन देने की बात कही। इससे यह स्पष्ट हो गया कि अदालत ने मामले में इन दोनों को ही पक्षकार माना है।

अयोध्या फैसले के मद्देनजर देशभर में सुरक्षा सख्त कर दी गई है और कई शहरों में इंटरनेट बंद कर दिया गया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को अतार्किक करार दिया

अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जमीन को तीन हिस्सों में बांटने के फैसले को अतार्किक करार दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 30 सितंबर, 2010 को अयोध्या में विवादित 2.77 एकड़ भूमि का फैसला सुनाया था, जिसमें उसने मामले के तीनों पक्षों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर जमीन बांटने का फैसला किया था।

हालांकि तीनों पक्षों ने यह फैसला मानने से इंकार कर दिया था। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दायर की गईं। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला पिछले नौ वर्षो से लंबित था।

16 अक्टूबर को पूरी हुई थी सुनवाई

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने 16 अक्टूबर को इस विवादास्पद मुद्दे पर अपनी सुनवाई पूरी की थी। पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस.ए. बोबडे, न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एस.ए. नजीर शामिल हैं।

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने इस विवादित मुद्दे को सुलझाने के लिए मध्यस्थता का आदेश दिया था, लेकिन यह विफल रही। आखिरकार अगस्त में शीर्ष अदालत ने मामले में सुनवाई शुरू की।

पाकिस्तान नई मुश्किल में घिरा, चीनी फर्म ने तत्काल मांगी 86 अरब की पेमेंट

इस्लामाबाद. एक चीनी फर्म ने पाकिस्तान से तत्काल आधार पर 86 अरब रुपये से अधिक का भुगतान करने की मांग की है. बिजनेस रिकॉर्डर की रिपोर्ट के अनुसार, चीन हुआनेंग ने पाकिस्तान की सेंट्रल पावर परचेजिंग एजेंसी गारंटी (सीपीपीए-जी) को 30 दिनों के भीतर भुगतान न करने का नोटिस दिया है. कंपनी ने 15 जुलाई 2022 को लिखे पत्र में भुगतान की मांग की थी.

चीनी कंपनी के उपाध्यक्ष फैन जिंदा ने प्रबंध निदेशक, प्राइवेट पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर बोर्ड (पीपीआईबी) को लिखे पत्र में कहा कि हुआनेंग शेडोंग रुई और पाकिस्तान एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (एचआरएस) के बीच हस्ताक्षरित गारंटी की धारा 1.5.1 के अनुसार और पीपीआईबी 23 जनवरी, 2017 को, एचआरएस पाकिस्तान सरकार को पीपीआईबी के माध्यम से सीपीपीए-जी द्वारा 86 अरब रुपये से अधिक की बकाया राशि का भुगतान न करने के बारे में सूचित कर रहा है.

कंपनी ने सीपीपीए-जी को आगाह किया है कि यदि पत्र जमा करने के 30 दिनों के भीतर अतिदेय राशि का निपटान नहीं किया जाता है, तो उसके पास गारंटी के तहत पाकिस्तान सरकार से राशि की मांग करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा.

बिजनेस रिकॉर्डर ने बताया कि एचआरएस के अनुसार, 14 जुलाई, 2022 तक ऊर्जा भुगतान और क्षमता भुगतान के कारण अतिदेय चालानों की कुल राशि 70,889,690,499 रुपये थी, साथ ही विलंबित भुगतान ब्याज से संबंधित अतिरिक्त राशि 15,387,545,709 रुपये थी. इस प्रकार, कुल अतिदेय राशि 86,277,236,208 रुपये है.’’

उपाध्यक्ष एचआरएस ने कहा, ‘‘86,277,236,208 रुपये की पूरी अतिदेय राशि का तत्काल आधार पर निपटारा करें.’’ उन्होंने चेतावनी दी कि अपर्याप्त कोयले के कारण बिजली संयंत्र के किसी भी बंद होने के परिणाम / क्षति सीपीपीए-जी को वहन करने की आवश्यकता होगी.

कंपनी ने अपना पत्र इस्लामाबाद में चीनी दूतावास, सीईपीसी प्राधिकरण के अध्यक्ष और संबंधित मंत्रालयों के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी साझा किया एएसआई संकेतक है.

पाकिस्तान भारी आर्थिक उथल-पुथल से जूझ रहा है और यह उम्मीद कर रहा है कि उसका सदाबहार सहयोगी चीन उसके बचाव में आएगा, हालांकि प्रख्यात अर्थशास्त्रियों का कहना है कि बीजिंग से उम्मीदें बहुत गलत हैं.

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश संबंध परिषद (सीएफआर), एक निकाय जो संप्रभु डिफॉल्ट जोखिम को ट्रैक करता है, ने हाल ही में श्रीलंका, यूक्रेन, रूस, वेनेजुएला, अर्जेंटीना, घाना, ट्यूनीशिया जैसे देशों के बराबर पाकिस्तान के स्कोरिंग को 10 (डिफॉल्ट होने की 50 प्रतिशत या उच्च संभावना का संकेत) रखा है. इनमें से कुछ देश पहले ही डिफॉल्ट कर चुके हैं.

इसके अलावा, नए सिरे से राजनीतिक अस्थिरता के बीच, फिच रेटिंग एजेंसी ने मंगलवार को पाकिस्तान के दृष्टिकोण को स्थिर से नकारात्मक कर दिया. एक बयान में, क्रेडिट रेटिंग इकाई ने ‘बी-’ पर दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा (एलटीएफसी) जारीकर्ता डिफॉल्ट रेटिंग (आईडीआर) की पुष्टि की.

फिच ने कहा, ‘‘पाकिस्तान की ‘बी-’ रेटिंग आवर्ती बाहरी भेद्यता, एक संकीर्ण राजकोषीय राजस्व आधार और ‘बी’ माध्यिका की तुलना में कम शासन संकेतक स्कोर को दर्शाती है.’’ नए स्टाफ-स्तर के साथ बाहरी फंडिंग की स्थिति और तरलता में सुधार की संभावना है. यह कदम 2022 की शुरुआत एएसआई संकेतक से देश की बाहरी तरलता की स्थिति और वित्तपोषण की स्थिति में महत्वपूर्ण गिरावट को देखते हुए आया है.

छत्तीसगढ़

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डालमिया समूह करेगा लाल किला का रखरखाव, विपक्ष ने उठाए सवाल

लाल किला मुगल बादशाह शाहजहां ने 17 वीं शताब्दी में बनवाया था. इस धरोहर की देखभाल अब डालमिया भारत समूह करेगा. सरकार ने राष्ट्रीय धरोहरों को गोद लेने की मुहिम के तहत लाल किला का ठेका डालमिया समूह को दे दिया है. लाल किला को ठेके पर दिए जाने की ख़बर आने के बाद सवाल उठने शुरू हो गए. असल में सरकार ने पिछले साल ‘एडॉप्ट ए हेरिटेज’ नाम की योजना शुरू की है जिसमें 90 से अधिक राष्ट्रीय धरोहरों को चिन्हित किया गया है. माना जा रहा है कि इसके तहत जल्द ही ताजमहल को गोद लेने की प्रक्रिया भी पूरी हो जाएगी. विपक्षी राजनीतिक पार्टियां इस कदम पर सवाल उठा रही हैं. सरकार ने डालमिया ग्रुप के साथ एक एमओयू साइन किया है. डालमिया ग्रुप के साथ सरकार ने 25 करोड़ का अनुबंध अगले पांच साल के लिए किया है. ऐतिहासिक स्मारक गोद लेने वाला भारत का यह पहला कॉर्पोरेट हाउस बन गया है. डालमिया ग्रुप का कहना है कि वह लाल किले को देखने आने वाले पर्यटकों की संख्या और इस धरोहर की ख्याति में कई गुना इजाफा करना चाहता है. पर्यटन मंत्रालय और डालमिया समूह के बीच हुए समझौते के तहत ‘द डालमिया भारत’ समूह धरोहर और उसके चारों ओर के आधारभूत ढांचे का रखरखाव करेगा. समूह ने इस उद्देश्य के लिए पांच वर्ष की अवधि में 25 करोड़ रूपये खर्च करने की प्रतिबद्धता जताई है. कांग्रेस ने लाल किला के रखरखाव की जिम्मेदारी एक निजी समूह को दिए जाने पर सवाल उठाया. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा ‘‘वे ऐतिहासिक धरोहर को एक निजी उद्योग समूह को सौंप रहे हैं. भारत और उसके इतिहास को लेकर आपकी क्या परिकल्पना है और प्रतिबद्धता है? हमें पता है कि आपकी कोई प्रतिबद्धता नहीं है लेकिन फिर भी हम आपसे पूछना चाहते हैं. उन्होंने सवाल किया क्या आपके पास धनराशि की कमी है. एएसआई के एएसआई संकेतक लिए निर्धारित राशि क्यों खर्च नहीं हो पाती. यदि उनके पास धनराशि की कमी है तो राशि खर्च क्यों नहीं हो पाती है? इस परियोजना के लिए इंडिगो एयरलाइंस और जीएमआर समूह दौड़ में थे. मंत्रालय के अनुसार डालमिया समूह ने 17 वीं शताब्दी की इस धरोहर पर छह महीने के भीतर मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने पर सहमति जताई है. इसमें पेयजल कियोस्क, सड़कों पर बैठने की बेंच लगाना और आगंतुकों को जानकारी देने वाले संकेतक बोर्ड लगाना शामिल है. समूह ने इसके साथ ही स्पर्शनीय नक्शे लगाना, शौचालयों का उन्नयन, जीर्णोद्धार कार्य करने पर सहमति जताई है. इसके साथ ही वह वहां 1000 वर्ग फुट क्षेत्र में आगंतुक सुविधा केंद्र का निर्माण करेगा. वह किले के भीतर और बाहर 3-डी प्रोजेक्शन मानचित्रण, बैट्री चालित वाहन और चार्ज करने वाले स्टेशन और थीम आधारित एक कैफेटेरिया भी मुहैया कराएगा.

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