ब्रोकर ट्रेडिंग इंस्ट्रूमेंट्स

क्रूड ऑयल ट्रेडिंग

क्रूड ऑयल ट्रेडिंग
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को सुबह WTI क्रूड ऑयल और ब्रेंट क्रूड दोनों के ही फ्यूचर भाव में गिरावट देखने को मिल रही है। WTI क्रूड ऑयल सोमवार सुबह 9.21 फीसद या 1.55 डॉलर की गिरावट के साथ 15.44 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेंड कर रहा था। वहीं, ब्रेंट ऑयल का फ्यूचर भाव सोमवार सुबह 2.46 फीसद या 0.55 डॉलर की गिरावट के साथ 24.23 डॉलर प्रति क्रूड ऑयल ट्रेडिंग बैरल पर ट्रेंड कर रहा था।

वायदा पर रोक लगाने से कमोडिटी के दाम में नरमी नहीं, IIM उदयपुर की रिपोर्ट में खुलासा

साल 2000 से अब तक के वायदा कारोबार पर नजर डालें तो रॉ जूट की वायदा पर 2005 में प्रतिबंध लगा था जबकि चावल की ट्रेडिंग पर 2007 पर प्रतिबंध लगा था।

कुछ कमोडिटी कीमतों में काफी उतार चढ़ाव देखने को मिला है। जिसका नतीजा यह है कि सरकार ने वायदा में उनकी ट्रेडिंग पर रोक लगा दी थी। इसी साल जनवरी के महीने में सेबी ने 7 कमोडिटी वायदा की ट्रेडिंग रोक दी थी। तब सेबी ने दलील दी थी कि इससे कीमतों के दाम घटेंगे। लेकिन हाल ही में आई IIM उदयपुर की एक रिपोर्ट वायदा पर रोक लगाने से कीमते कम होने की दलील को सही नहीं मानती। इस रिपोर्ट के मुताबिक कमोडिटी वायदा पर रोक के बाद भी कीमतें बढ़ती देखी गई हैं। यानी रिपोर्ट के मुताबिक वायदा पर रोक लगाने से स्पॉट (हाजिर भाव) के भावों पर कोई असर नहीं पड़ता।

आइए देखते है कि कब- कब किन कमोडिटीज की वायदा ट्रेडिंग पर रोक लगी है और इसका क्या असर हुआ है। यहां हम इस रोक के असर को समझने के लिए 2021 में सरसों की वायदा ट्रेडिंग पर लगाए गए प्रतिबंध और उसके असर का विश्लेषण करेंगे।

शेयर मार्केट से कितना अलग है कमोडिटी मार्केट, जानिए कैसे होती है कमोडिटी ट्रेडिंग?

शेयर बाजार ने भी निवेशकों को निराश नहीं किया. तेजी से दौरान निवेशकों को बंपर मुनाफा मिला. लेकिन यूरोप में यूद्ध के माहौल से सुरक्षित निवेश की मांग तेजी से बढ़ी है. क्योंकि शेयर बाजार में कमजोरी का ट्रेंड है.

कोरोना महामारी के बाद शेयर मार्केट में निवेशकों की संख्या में रिकॉर्ड क्रूड ऑयल ट्रेडिंग बढ़त देखने को मिली है. इसी साल अगस्त में डीमैट खातों की संख्या पहली बार 10 करोड़ के पार पहुंच गई. हालांकि, शेयर बाजार ने भी निवेशकों को निराश नहीं किया. तेजी से दौरान निवेशकों को बंपर मुनाफा मिला. लेकिन यूरोप में यूद्ध के माहौल से सुरक्षित निवेश की मांग तेजी से बढ़ी है. क्योंकि शेयर बाजार में कमजोरी का ट्रेंड है. ऐसे में कमोडिटी मार्केट में सोने और चांदी की मांग तेजी देखने को मिली है. क्या आपको पता है कि कमोडिटी मार्केट क्या है और यह इक्विटी यानी शेयर मार्केट से कितना अलग है.

कमोडिटी मार्केट क्या है?

कमोडिटी मार्केट (क्रूड ऑयल ट्रेडिंग Commodity Market) यह एक ऐसा मार्केटप्लेस है जहां निवेशक मसाले, कीमती मेटल्स, बेस मेटल्स, एनर्जी, कच्चे तेल जैसी कई कमोडिटीज की ट्रेडिंग करते हैं.

  • एग्री या सॉफ्ट कमोडिटीज में मसाले जैसे काली मिर्च, धनिया, इलायची, जीरा, हल्दी और लाल मिर्च हैं. इसके अलावा सोया बीज, मेंथा ऑयल, गेहूं, चना भी इसी का हिस्सा हैं.
  • नॉन-एग्री या हार्ड कमोडिटीज में सोना, चांदी, क्रूड ऑयल ट्रेडिंग कॉपर, जिंक, निकल, लेड, एन्युमिनियम, क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस शामिल हैं.

इक्विटी मार्केट क्रूड ऑयल ट्रेडिंग और कमोडिटी मार्केट में क्या अंतर है?

  • इक्विटी मार्केट में लिस्टेड कंपनियों के शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं. वहीं कमोडिटी मार्केट में कच्चे माल को बेचा और खरीदा जाता है.
  • इक्विटी के होल्डर को शेयरहोल्डर कहा जाता है, जबकि कमोडिटी के होल्डर को ऑप्शन कहा जाता है.
  • शेयरहोल्डर को पार्शियल कंपनी का मालिक माना जाता है, लेकिन कमोडिटी मालिकों को नहीं.
  • इक्विटी शेयरों की समाप्ति तिथि नहीं होती है. जबकि कमोडिटी में ऐसा नहीं होता है.
  • इक्विटी मार्केट में शेयरहोल्डर डिविडेंड के योग्य माना जाता है. वहीं कमोडिटी मार्केट में डिविडेंड का प्रावधान नहीं होता.

भारत में कमोडिटी ट्रेडिंग के लिए प्रमुख एक्सचेंज हैं. इसमें मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX), नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) के साथ-साथ यूनिवर्सल कमोडिटी एक्सचेंज (UCX), नेशनल मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (NMCE), इंडियन कमोडिटी एक्सचेंज (ICEX), ACE डेरिवेटिव्स एंड कमोडिटी एक्सचेंज लिमिटेड शामिल हैं.

Angel Broking ने क्रूड ऑयल फ्यूचर्स में ट्रेडिंग को अस्थायी रूप से रोका, देश में 43 दिनों से यथावत हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

Angel Broking ने क्रूड ऑयल फ्यूचर्स में ट्रेडिंग को अस्थायी रूप से रोका, देश में 43 दिनों से यथावत हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

नई दिल्ली बिजनेस डेस्क। भारतीय स्टॉक ब्रोकरेज फर्म एंजेल ब्रोकिंग ने अपने निवेशकों को ऑयल मार्केट के मौजूदा संकट से बचाने के लिए क्रूड ऑयल फ्यूचर्स में ट्रेडिंग को अस्थायी रूप से रोक दिया है। पिछले सप्ताह सोमवार को WTI क्रूड के भाव के शून्य से नीचे चले जाने आने और उसके बाद ब्रेंट ऑयल के दो दशकों के निचले स्तर पर आ जाने के बाद एंजेल ब्रोकिंग ने यह फैसला लिया है। बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार एंजेल ब्रोकिंग से सूत्रों ने यह जानकारी दी है। वहीं, सोमवार को WTI क्रूड और ब्रेंट ऑयल दोनों के ही फ्यूचर भाव में गिरावट देखने को मिल रही है।

सरसों, सोयाबीन, चना जैसी एग्री कमोडिटी के फ्यूचर ट्रेड से बैन हटाने के पक्ष में है एनसीडेक्स, जानिए क्या है वजह?

सरसों

नई दिल्ली: देश में बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले साल कई एग्री कमोडिटी के फ्यूचर कारोबार पर रोक लगा दी थी. पिछले दिनों एक रिपोर्ट आई है जिसमें कहा गया है कि एग्री कमोडिटी के फ्यूचर ट्रेड से बाजार में उसके भाव पर कोई असर नहीं पड़ता. पिछले साल ही भारत सरकार ने कई एग्री कमोडिटी के भाव पर काबू पाने के लिए उनके फ्यूचर कारोबार पर रोक लगाने का फैसला किया था. नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव एक्सचेंज या एनसीडेक्स के एमडी और सीईओ अरुण रास्ते ने कहा है इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि फ्यूचर ट्रेड से किसी एग्री कमोडिटी के भाव पर असर पड़ता है, इसलिए जिन एग्री कमोडिटी पर के फ्यूचर ट्रेड पर बैन लगाया गया है, उसे हटा दिया जाना चाहिए.

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भारत सरकार ने पिछले साल सरसों, सोयाबीन और चना जैसी एग्री कमोडिटी के फ्यूचर ट्रेडिंग पर बैन लगा दिया था. इससे किसानों को अपनी कृषि उपज के सही भाव नहीं मिल पा रहे हैं.

कमोडिटी के भाव में तेजी आने का फ्यूचर्स/डेरिवेटिव ट्रेडिंग से संबंध नहीं, जानिए क्या कहती है नई रिपोर्ट

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दो कमोडिटी को लेकर की गई एक रिसर्च में बताया गया कि जिन कमोडिटी में फ्यूचर ट्रेडिंग पर प्रतिबंध लगा दिया, तब भी बाजार में इनकी कीमत में कमी नहीं आई.

नई दिल्ली: हाल में ही आई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि डेरिवेटिव ट्रेडिंग की वजह से कमोडिटी के भाव बढ़ने का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है. इसके साथ ही किसी कमोडिटी की डेरिवेटिंग ट्रेडिंग पर बैन लगा दिए जाने की वजह से कीमतों में कमी का भी कोई सबूत नहीं मिला है. शिक्षाविदों के एक ग्रुप की स्टडी के बाद यह रिपोर्ट पेश की गई है. पिछले काफी समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि कमोडिटी ट्रेडिंग की वजह से देश में कई जींस और कमोडिटी के भाव में उतार-चढ़ाव होता है जिस वजह से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है.

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कमोडिटी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स के इन्वेस्टर प्रोटक्शन फंड की एक स्टडी में भी यह बात सामने आई है. दो कमोडिटी को लेकर की गई एक रिसर्च में बताया गया कि जिन कमोडिटी में फ्यूचर ट्रेडिंग पर प्रतिबंध लगा दिया, तब भी बाजार में इनकी कीमत में कमी नहीं आई. इनकी फ्यूचर ट्रेडिंग की इजाजत दे देने के बाद भी बाजार में इनके भाव में तेजी दर्ज नहीं की गई.

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