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शेयर मार्केट के फायदे

शेयर मार्केट के फायदे

Market Cap: सेंसेक्स की टॉप 10 में से आठ कंपनियों का मार्केट कैप 42,173 करोड़ रुपये बढ़ा, इन शेयरों ने कराई कमाई

Market Cap: बीता हफ्ता सेंसेक्स के कारोबार के लिहाज से भले ही थोड़ा गिरावट में रहा हो लेकिन टॉप 10 में से 8 कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन अच्छा बढ़ा है.

By: ABP Live | Updated at : 20 Nov 2022 12:41 PM (IST)

शेयर बाजार (फाइल फोटो)

Market Cap: सेंसेक्स की टॉप 10 में से आठ कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन (मार्केट कैप) में बीते सप्ताह 42,173.42 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई. सबसे अधिक फायदे में आईसीआईसीआई बैंक, इन्फोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) रहीं. बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 131.56 अंक या 0.21 फीसदी के नुकसान में रहा है.

सबसे ज्यादा फायदे में रहा आईसीआईसीआई बैंक
सप्ताह के दौरान आईसीआईसीआई बैंक का मार्केट कैपिटलाइजेशन 9,706.86 करोड़ रुपये बढ़कर 6,41,898.91 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. इन्फोसिस के मार्केट वैल्यूएशन में 9,614.89 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई और यह 6,70,264.99 करोड़ रुपये रहा. टीसीएस का मार्केट कैपिटलाइजेशन 9,403.76 करोड़ रुपये बढ़कर 12,22,781.79 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.

जानें और शेयरों में कितना मिला फायदा
भारती एयरटेल की बाजार हैसियत 5,869.21 करोड़ रुपये के उछाल के साथ 4,65,642.49 करोड़ रुपये और एचडीएफसी की 3,415.33 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी के साथ 4,85,234.16 करोड़ रुपये रही. एचडीएफसी बैंक का मार्केट वैल्यूएशन 1,508.95 करोड़ रुपये बढ़कर 8,99,489.20 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. एसबीआई का मूल्यांकन 1,383.32 करोड़ रुपये की वृद्धि के साथ 5,37,841.73 करोड़ रुपये रहा. अडानी एंटरप्राइजेज का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1,271.1 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी के साथ 4,58,263.35 करोड़ रुपये रहा.

रिलायंस और एचयूएल रहे नुकसान में
समीक्षाधीन बीते हफ्ते में रिलायंस इंडस्ट्रीज और हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) को छोड़कर बाकी आठ कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इनमें एचडीएफसी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और एचडीएफसी शामिल हैं. टॉप 10 शेयरों में से 8 स्टॉक्स के इस रुख के उलट रिलायंस इंडस्ट्रीज की बाजार हैसियत 22,866.5 करोड़ रुपये घटकर 17,57,339.72 करोड़ रुपये रह गई. हिंदुस्तान यूनिलीवर का मूल्यांकन 4,757.92 करोड़ रुपये घटकर 5,83,462.25 करोड़ रुपये रह गया.

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जानें टॉप 10 में कौन रहा नंबर वन
शीर्ष 10 कंपनियों की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर कायम रही. उसके बाद क्रमश: टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, इन्फोसिस, आईसीआईसीआई बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एसबीआई, एचडीएफसी, भारती एयरटेल और अडानी एंटरप्राइजेज का स्थान रहा.

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Published at : 20 Nov 2022 12:41 PM (IST) Tags: sensex nifty stock market reliance industries TCS Market Cap Stock Market हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें abp News पर। सबसे शेयर मार्केट के फायदे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ पर पढ़ें बॉलीवुड, खेल जगत, कोरोना Vaccine से जुड़ी ख़बरें। For more related stories, follow: Business News in Hindi

शेयर बाजार में निवेश करने के लिए क्या करना होता है? 8 बुनियादी सवालों के जवाब

Share Market Guide: शेयर खरीदने के लिए क्या करना होगा, किस कंपनी का शेयर खरीदे?

शेयर बाजार में निवेश करने के लिए क्या करना होता है? 8 बुनियादी सवालों के जवाब

महंगाई (Inflation) बढ़ रही है और रुपये (Rupee) का मूल्य घट रहा है. यानी सिर्फ पैसा बचाने से काम शेयर मार्केट के फायदे नहीं चलेगा, पैसा बढ़ाना भी पड़ेगा. ऐसे में शेयर बाजार (Share Market) में निवेश अच्छा विकल्प हो सकता है. लेकिन शेयर मार्केट (Stock Market) में पहली बार निवेश करने वालों के लिए क्या जानना जरूरी है? शेयर बाजार में निवेश करने के लिए क्या करना होता है?

कब कर सकते हैं? किस शेयर में पैसा लगाएं? ये सारी बातें यहां हम आपको बता रहे हैं.

शेयर बाजार में निवेश करने के लिए क्या करना होता है? 8 बुनियादी सवालों के जवाब

1. शेयर क्या है?

किसी कंपनी को चलाने के लिए पूंजी यानी कैपिटल की जरूरत पड़ती है. अब कंपनी को चलाने के लिए मालिक बाजार से पैसा उठाना चाहता है तो वह कैपिटल को हिस्सों में बांट देता है यही हिस्से कहलाते हैं शेयर. जैसे किसी कंपनी की कैपिटल 100 रुपये है. अब कंपनी इसे 100 हिस्सों में बांट दें तो वे 100 हिस्से शेयर्स कहलाएंगे और एक शेयर एक रुपये का होगा. अब इसी कैपिटल को दो या 5 हिस्सों में भी बांटा जा सकता है. यानी कंपनी की एक यूनिट एक शेयर के बराबर होती है.

अब आप किसी कंपनी का हिस्सा बनना चाहते हैं तो उसके शेयर खरीद सकते हैं. इन्हीं शेयर्स की जब आप खरीदी बिक्री करने जिस बाजार में जाएंगे उसे कहते हैं शेयर बाजार.

2. शेयर खरीदने के लिए क्या करना होगा?

शेयर बाजार में पांव रखने से पहले आपको चाहिए डिमैट अकाउंट. जैसे बैंक में बचत, एफडी में निवेश के लिए बैंक अकाउंट चाहिए वैसे ही शेयर मार्केट में निवेश के लिए डिमैट अकाउंट होना जरूरी है. डीमैट के जरिए ही शेयर्स को खरीदा-बेचा जाता है, होल्ड किया जाता है. यह एक तरह से शेयर्स का डिजिटल अकाउंट है.

3. डीमैट अकाउंट क्या है

डीमैट अकाउंट मतलब- डीमटेरियलाइज्ड यानी किसी भी फिजिकल चीज का डिजिटलाइज होना. डिमैट अकाउंट आप चंद सैकेंड में खोल सकते हैं. आधार कार्ड, पैन कार्ड जैसी केवाईसी डॉक्यूमेंट लगती हैं. इसके लिए ब्रोकर की जरूरत होती है. अब ब्रोकर कोई व्यक्ति भी हो सकता है और कंपनी भी. ब्रोकर की वेबसाइट या एप पर जाकर डिमैट अकाउंट आसानी से खोला जा सकता है. अगर आप नेटबैंकिंग करते हैं तो आपके बैंक की वेबसाइट या एप पर भी डिमैट अकाउंट खोल सकते हैं. आमतौर पर इसकी लिए कोई फीस नहीं देनी होती लेकिन यह कंपनी पर निर्भर करता है कि वे डिमैट के लिए कितना वसूलना चाहते हैं.

4. किस कंपनी का शेयर खरीदें?

जवाब है किसी अच्छी कंपनी है, क्योंकि अच्छी कंपनी के शेयर्स अच्छा रिटर्न देते हैं. अच्छी कंपनी मतलब जिसका प्रॉफिट, प्रोडक्ट, भविष्य अच्छा हो. शेयर मार्केट की भाषा में इसे कंपनी के फंडामेंटल्स यानी बुनियादी बातें कहते हैं, कंपनी के फंडामेंटल्स अच्छे हैं तो कंपनी का भविष्य अच्छा माना जाता है. इसके लिए आपको कंपनी की सालाना बैलेंस शीट पर नजर रखनी होती है. यानी कंपनी कितना कमा रही है, कितना कर्ज है, कितना मुनाफा हो रहा है? कंपनी के शेयर्स ने पहले कैसा प्रदर्शन किया है. ये सब देखना होता है. कई बार खबरें भी कंपनी के शेयर्स को प्रभावित करती हैं. जैसे कि जब दुनिया के सबसे अमीर आदमी ईलॉन मस्क ने ट्विटर को खरीदने का ऐलान किया तो निवेशकों में ट्विटर के शेयर्स को खरीदने की होड़ लग गई. लेकिन निवेशक केवल कंपनी के फंडामेंटल्स पर ध्यान दें तो भी काम बन सकता है. सबसे पहले ऐसे शेयर में निवेश करें जो सुरक्षित हैं. यानी उन बड़ी कंपनियों के शेयर्स खरीदें जो दशकों पुरानी हैं, प्रॉफिट में रहती है और आगे भी रहेंगी. इससे आप नुकसान में नहीं रहेंगे. जब इसमें निवेश कर लें तो शेयर्स को स्टडी करना सीखें, कंपनी की बैलेंस शीट पढ़ना सीखें.

5. प्राइमरी मार्केट और सेकेंडरी मार्केट क्या है?

जब आप कोई शेयर सीधे कंपनी से खरीदते हैं जैसे की आईपीओ के जरिए.. यह प्राइमरी मार्केट है. यानी कंपनियां जो शेयर्स बाजार में इश्यू करती है. लेकिन जब सीधे कंपनी से खरीदे हुए शेयर्स को आप अन्य खरीदारों में बेचने जाते हैं तो वो सेकेंड्री मार्केट है. यानी इश्यू किए हुए शेयर्स की जब खरीद बिक्री होती है.

6. ट्रेडिंग या निवेश?

एक्सपर्ट कहते हैं कि 5 साल, 10 साल या उससे भी ज्यादा समय के लिए निवेश करने वाले फायदे में रहते हैं. यानी लॉन्ग टर्म इंवेस्टमेंट. अब शेयर बाजार को गहनता से समझने वाले और रिस्क उठा सकने वाले ही शॉर्ट टर्म या हर रोज शेयर बाजार में निवेश कर सकते हैं. कितना और कितने समय के लिए निवेश? अब सबसे पहले आप ये तय करें कि निवेश कितना करना है और कितने समय के लिए. फिर तय करें कि आप निवेश करना क्यों चाहते हैं यानी कि आपका उद्देश्य क्या है. जैसे, शिक्षा, शादी या घर खरीदने जैसे गोल्स. इसी शेयर मार्केट के फायदे अनुसार आप आगे बढ़ते हैं और तभी आप फैसला ले पाएंगे कि आपको किस शेयर में निवेश करना है. शेयर मार्केट में शुरुआत धीमी रखें.

7. शेयर बाजार नहीं समझते हैं तो कैसे निवेश करें?

अगर आपके पास इन सब के लिए समय नहीं है या समझ नहीं है तो ऐसी स्थिति में आप किसी फाइनेंशियल एक्सपर्ट से ही सलाह लें, एक्सपर्ट को बताएं कि आप कितना खर्च करना चाहते हैं और कितने समय के लिए. आपका निवेश का उद्दश्य क्या है और आप निवेश से कितने रिटर्न की अपेक्षा रखते हैं. एक उपाय म्यूचुअल फंड भी हैं. जिसमें कुछ एक्सपर्ट आपके जैसे कई निवशकों के पैसे को कहां लगाना है ये तय करते हैं.

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शेयर बाजार के फायदे और नुकसान

इन दिनों शेयर मार्केट के बारे में हर कोई चर्चा कर रहा है, हो सकता है आप भी अपना पैसा स्टॉक मार्केट में लगाने के बारे में सोच रहे हों। आज हम शेयर बाजार के फायदे और नुकसान के बारे बात करने वाले हैं। शेयर बाजार एक ऐसी जगह है जहाँ से आप अच्छा-ख़ासा पैसा कमा सकते हैं लेकिन इसके विपरीत भी हो सकता है यानी आपको नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

ताजा उदाहरण देखें तो हाल ही में आये कोरोना महामारी की वजह से स्टॉक मार्केट बुरी तरह से गिर गया था सभी निवेशकों के पोर्टफोलियो में 80-90% तक का नुकसान दिखाई दे रहा था इस स्थिति में जिन लोगों ने घबराहट में अपने स्टॉक्स बेच दिए उन्हें नुकसान उठाना पड़ा है।

लेकिन यह महामारी शेयर बाजार के जानकारों के लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आया था। बड़े निवेशकों को ऐसे मौके का इंतजार होता है और इस मौके पर अच्छी कंपनियों के स्टॉक्स को बहुत कम भाव में खरीद पाते हैं। कोरोनाकाल के बाद मार्केट बड़ी तेजी से ऊपर जाता हुआ दिखा और अपने उच्चतम स्तर को भी तोड़कर आगे बढ़ चुका है। इस प्रकार से स्टॉक मार्केट के अपने फायदे भी है और नुकसान भी आइये शेयर बाजार के फायदे और नुकसान के बारे में विस्तार से जानते हैं।

Table of Contents

शेयर बाजार के फायदे

कम समय में अच्छा मुनाफा कमाने की संभावना: शेयर बाजार निवेश का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें कम समय के निवेश में भी अधिक लाभ कमाए जा सकते हैं। यदि हम बैंक एफडी, बचत खाते आदि की बात करें तो ये सभी लम्बे अवधि के निवेश में एक निर्धारित रिटर्न दे पाते हैं लेकिन स्टॉक मार्केट में कम अवधि में अच्छा मुनाफा मिल सकता है यह पूरी तरह से निवेश किये गये कम्पनी के कामकाज और मार्केट के माहौल पर निर्भर करती है।

अधिक रिटर्न मिलने की संभावना: चूंकि अधिकांश सूचीबद्ध शेयर इक्विटी शेयर हैं, उनका मूल्य सीधे कंपनी के मूल्य से संबंधित है, इस प्रकार जब कोई कंपनी अच्छा प्रदर्शन कर रही है तो कंपनी के शेयरों के मूल्य में पर्याप्त वृद्धि होती है जो अच्छा रिटर्न प्रदान करती है।

कंपनी में हिस्सेदारी मिलती है: जब आप किसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं तो आप उस कंपनी के हिस्सेदार बन जाते हैं। चाहे आपके पास कितने भी शेयर क्यों न हो आप कंपनी के ग्रोथ में भागीदार होते हैं और बदले में आपको वोटिंग अधिकार, लाभांश, बोनस आदि प्राप्त हो सकते हैं।

कभी भी शेयर खरीद और बेच सकते हैं: स्टॉक मार्केट पैसा लगाना और निकालना बहुत आसान है। आप कभी भी किसी भी लिक्विड स्टॉक को खरीद और बेच सकते हैं। आप कभी भी फायदे या नुकसान में अपना पैसा बाहर निकाल सकते हैं। बैंक एफडी या सरकारी बॉन्ड की तरह यहाँ कोई निर्धारित निवेश अवधि नहीं होती है।

महंगाई से बचने का उपाय: मुद्रास्फीति से बचने के लिए शेयर बाजार में निवेश एक अच्छा उपाय है, क्योंकि शेयर बाजार में निवेश थोड़े समय के दौरान उतार-चढ़ाव हो सकता है, लेकिन लंबी अवधि में सामान्य पूंजी वृद्धि के कारण शेयर का मूल्य महंगाई दर से अधिक बढ़ता है। उदाहरण के लिए, जून 2020 में महंगाई की दर 6% है और स्टॉक मार्केट निवेश पर औसत रिटर्न दर 16% रही है।

डिविडेंड आय: कंपनियां शेयरधारकों को लाभांश के रूप में प्रति वर्ष आय भी प्रदान करती हैं जो की सीधे उनके बैंक खाते में ट्रान्सफर हो जाते हैं। हालांकि यह राशि हर वर्ष अलग-अलग हो सकती है, कंपनी के मुनाफे के अनुसार यह कम या अधिक हो सकता है। जहां कंपनी को कोई लाभ नहीं तो डिविडेंट नहीं मिल सकता है।

डायवर्सिफिकेशन: शेयर बाजार के फायदे की लिस्ट में डायवर्सिफिकेशन का एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसका मतलब यह है की निवेशक अपने पोर्टफोलियो में अलग-अलग सेक्टर और उद्योग के अनुसार अलग-अलग कंपनी के स्टॉक में निवेश कर सकता है। डायवर्सिफिकेशन जोखिम को कम करता है और मुनाफे की संभावना को बढ़ाता है।

निवेश करना आसन और सुविधाजन है: शेयर बाजार में निवेश करना सबसे अधिक सुविधाजन निवेशों में से एक है। आप बड़ी आसानी से ट्रेडिंग अकाउंट खोल सकते हैं और अपने कंप्यूटर या मोबाइल से ऑनलाइन शेयर खरीद सकते है।

शेयर बाजार के नुकसान

अस्थिर निवेश: शेयर बाजार अत्यंत अस्थिर (volatile) है इसमें लगातार उतार-चढाव होते रहते हैं। शेयर का भाव कभी भी बढ़ सकता है या घट सकता है। शेयरों के मूल्य को प्रभावित करने वाले कोई एक नही बल्कि कई सारे कारक हैं जैसे: बजट, सरकारी नीतियां, क्षेत्रीय घटनाएँ, महामारी या आपदाएं, कंपनी के लाभ-हानि, कंपनी के प्रबंधन में परिवर्तन आदि।

जानकारी का आभाव: स्टॉक मार्केट में ज्यादातर निवेशक किसी ब्रोकर या अन्य व्यक्ति की राय से अपना पैसा निवेश कर देते हैं जो की सही नही है। निवेश करने से पहले निवेशक को स्वयं शेयर बाजार का ज्ञान लेना जरुरी है। हालांकि सेबी और स्टॉक एक्सचेंजों के द्वारा कंपनियों को निवेशकों के लाभ के लिए सम्बंधित जानकारी का खुलासा करने का निर्देश होता है। लेकिन इसके बावजूद अधिकांश निवेशक अपने लाभ के लिए इस जानकारी का विश्लेषण और उपयोग करने में असमर्थ हैं। निवेशकों को इसके लिए प्रशिक्षण और अभ्यास की बहुत ज्यादा आवश्यकता है।

समय लग सकता है: निवेश करने के लिए हमें अच्छे स्टॉक्स की जरुरत होती है। एक अच्छे स्टॉक को सही समय पर खरीदना जरुरी है इसके लिए हमें एनालिसिस करना आना चाहिए। आपको शेयर बाजार पर भी नजर रखनी होगी, क्योंकि बाजार के गिरावट में सबसे अच्छी कंपनी की कीमत भी गिर सकती है। सही शेयर को ढूंढना, सही भाव का इंतजार करना और उसमे निवेशित रहना इसमें काफी समय लग सकता है।

निवेशक को अंतिम में भुगतान किये जाते हैं: जैसे किसी बिज़नेस के मालिक को अंत में पैसे मिलते हैं ठीक उसी तरह निवेशको को अंतिम में भुगतान किये जाते हैं क्योंकि स्टॉक एक व्यवसाय के स्वामित्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। एक कंपनी को पहले अपने कर्मचारियों, आपूर्तिकर्ताओं, लेनदारों को भुगतान करना होता है। इसके अलावा व्यवसाय को चलाने के लिए जरुरी सुविधाओं और टैक्स के लिए भुगतान करना पड़ता है। फिर बचा हुआ कोई भी पैसा उसके मालिकों के बीच वितरित किया जाता है।

टैक्स: शेयर बाजार में निवेश करने पर आपको स्टॉक की खरीदी-बिक्री और इनकम पर टैक्स देना पड़ता है। यहाँ तक की यदि आप अपने निवेश किये गये शेयर को नुकसान में भी बेचते हैं तो भी आपको टैक्स देने पड़ सकते हैं।

ब्रोकरेज: जब कोई निवेशक शेयर खरीदता या बेचता है तो उसे ब्रोकर को ब्रोकरेज शुल्क के रूप में एक निश्चित अनुपात का भुगतान करना होता है। चाहे आप लाभ में हो या घाटे में आपको ब्रोकरेज फीस देनी ही पड़ती है।

भावनाओं को काबू में रखना जरुरी है: स्टॉक की कीमतें लगातार हर सेकंड बढ़ती और गिरती हैं। लोग अपनी भावनाओं को नियंत्रित नही कर पाते हैं और स्टॉक को बढ़ता हुआ देख लालच के कारण अधिक मात्रा में खरीदते हैं, और गिरने पर डर के कारण बेच देते हैं। सबसे अच्छा तरीका है कि निवेश करने से पहले जोखिम को ध्यान में रख कर निवेश करें और शेयरों की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लगातार न देखें।

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निष्कर्ष

शेयर बाज़ार में निवेश करना फायदेमंद तो है ही लेकिन इसमें जोखिम भी शामिल हैं। आप अपना पैसा किसी स्टॉक क्यों निवेश कर रहे हैं यह आपको पता होना चाहिए। नये लोगों को हमेशा निवेश करने से पहले शेयर बाजार के बारे में सीखने की सलाह दी जाती है। यदि आप पहली बार शेयर बाजार में निवेश करने का निर्णय लेते हैं, तो केवल वही राशि निवेश करें जिसे आप नुकसान के रूप में देख पायें। जोखिम और लाभ दोनों को समझने के लिए आपको अपना शोध ठीक से करने की भी आवश्यकता है। हमेशा एक रणनीति या योजना बनाकर ही निवेश करे जिससे आप शेयर बाजार में खुश और समृद्ध रहेंगे।

फायदे की बात: शेयर मार्केट से हुई कमाई पर भी देना होता है टैक्स, प्रॉफिट बुक करने सहित इन 3 तरीकों से बचा सकते हैं पैसा

वित्त वर्ष 2021-22 खत्म होने में अब 2 हफ्ते का ही समय बचा है। हम सभी जानते हैं कि इक्विटी इन्वेस्टमेंट पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स देना होता है। इसलिए ये जानना भी बहुत जरूरी है कि कैपिटल गेन टैक्स को कैसे कम किया जा सकता है। आज हम आपको ऐसे 3 तरीकों के बारे में बता रहे हैं जिससे आप कैपिटल गेन पर टैक्स बचा सकते हैं।

1. स्टॉक्स और इक्विटी फंड्स से प्रॉफिट बुक करें
स्टॉक्स और इक्विटी ओरिएंटेड फंड्स पर 1 लाख रुपए से ज्यादा के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस पर अब टैक्स लगता है। अगर आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हुआ है तो आपके लिए 1 लाख रुपए तक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स छूट का फायदा उठाने का यही मौका है। 31 मार्च से पहले इस हिसाब से प्रॉफिट बुक करें कि टैक्स छूट का लाभ मिल जाए।

इसके लिए आपको 31 मार्च से पहले उतने स्टॉक्स और इक्विटि फंड्स बेच देने चाहिए, जितने पर 1 लाख रुपए तक का लाभ मिल जाए। फिर इसी पैसे को अगले वित्त वर्ष में दोबारा इन्वेस्ट कर दें।

2. नुकसान सेट-ऑफ करें
जब हम शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो हमें नुकसान भी होता है। इन नुकसानों को उसी वित्तीय वर्ष के कैपिटल गेन से सेट-ऑफ कर दें यानी उस घाटे को मुनाफे के साथ समायोजित कर दें। शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस को शॉर्ट और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के साथ एडजस्ट किया जा सकता है। हालांकि, लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस को सिर्फ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के साथ ही एडजस्ट कर सकते हैं। कोई भी बचा हुआ घाटा अगले 8 सालों तक कैरी-फारवर्ड किया जा सकता है।

3. कैपिटल गेन छूट का दावा
आयकर अधिनियम करदाता को कैपिटल गेन पर छूट का दावा करने की अनुमति देता है। धारा 54ईसी के तहत करदाता भूमि या भवन जैसी अचल संपत्ति में निवेश से प्राप्त हुए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की छूट का दावा करने के लिए कैपिटल गेन बॉन्ड में निवेश कर सकते हैं।

हालांकि, इन बॉन्ड्स में 5 सालों का लॉक इन पीरियड होता है, और इन पर लगभग 5% की ब्याज दर मिलती है। इसलिए निवेशक को इस बात का मूल्यांकन कर लेना चाहिए कि ऐसे कम रिटर्न वाले लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट उनके लिए ठीक हैं या नहीं।

शेयर बाजार में लॉन्ग टर्म निवेश के फायदे

Benefit of long term investment in stock market शेयर बाजार में लॉन्ग टर्म निवेश करने पर मुनाफे के चांस ज्यादा रहते हैं लंबी अवधि के लिए किए गए निवेश में नुकसान होने की गुंजाइश बहुत ही कम रहती है जो निवेशक स्टॉक मार्केट में लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करते हैं वह शेयर बाजार से अच्छा रिटर्न कमाते हैं long term investment एक फायदा यह भी होता है कि रिटर्न आपको भले ही ज्यादा ना मिले किंतु नुकसान ना के बराबर रहता है इसीलिए शेयर बाजार में नए निवेशकों को लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करना चाहिए

Stock market ने निवेश के प्रकार

शेयर बाजार में निवेशक 3 तरीके से निवेश करते हैं

  1. लॉन्ग टर्म निवेश long term investment
  2. शॉर्ट टर्म निवेश short tarm investment
  3. इंट्राडे निवेश indraday investment

उपयुक्त 3 तरह से अक्सर लोग शेयर मार्केट में निवेश करते हैं

लॉन्ग टर्म निवेश

दीर्घकालीन समय के लिए यदि कोई निवेशक निवेश करता है तो उसे लॉन्ग टर्म निवेश कहते हैं लॉन्ग टर्म निवेश में निवेशक अगले 6 महीने से 1 वर्ष 2 वर्षीय और भी अधिक समय के लिए निवेश करता है आगे आने वाले समय में यदि बच्चों की शादी करना है घर खरीदना है या ऐसे और कोई भी मोटे खर्चे हैं तो long term nivesh करना ही समझदारी है

शॉर्ट टर्म निवेश

अल्पावधि के लिए किया गए निवेश को शॉर्ट टर्म निवेश कहते हैं इस तरह के निवेश में निवेशक कुछ दिनों से लेकर कई हफ्तों तक के लिए निवेश करता है और सही समय देखकर मुनाफावसूली कर लेता है short term nivesh मौजूदा समय में काफी प्रचलित है स्टॉक मार्केट में बड़े निवेशक शॉर्ट टर्म निवेश करना पसंद करते हैं

इंट्राडे निवेश

1 दिन के लिए किए गए निवेश को इंट्राडे निवेश कहते हैं यह निवेश काफी जोखिम भरा होता है किंतु इसमें प्रॉफिट भी अधिक मिलता है इसीलिए निवेशकों को indraday trading भी काफी पसंद है 1 दिन के लिए किए गए निवेश में यह कोई जरूरी नहीं है कि आपको प्रॉफिट ही मिले नुकसान भी होने की गुंजाइश बनी रहती है कभी-कभी तो इंट्राडे ट्रेडिंग में अत्यधिक लाभ होता है और कभी कभी हानि हो जाती है निवेश की दृष्टि से यह बिल्कुल सही नहीं है

हां इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए व्यक्ति अपनी समर्थ अनुसार शेयर मार्केट में खरीद बिक्री कर के जोखिम उठाता है और कमाई करता है जिसे हम निवेश नहीं कह सकते हैं

Benefit of long term investment in stock market

लॉन्ग टर्म के लिए निवेश कई तरीके से करते है जैसे कि लंबी अवधि के लिए शेयर खरीदना गोल्ड खरीदना बॉन्ड खरीदना बैंक में एफडी रखना या जमीन मकान आदि खरीदना यह सब लॉन्ग टर्म के लिए निवेश हैं निवेशक लॉन्ग टर्म निवेश में आज भी विश्वास रखते हैं

Long term investment

लॉन्ग टर्म निवेश के नुकसान

वैसे तो लॉन्ग टर्म निवेश में हानि होने की गुंजाइश बहुत ही कम रहती है फिर भी अगर रिटर्न के हिसाब से देखा जाए तो हानि दिखाई देने लगती है

उदाहरण के तौर पर मान लीजिए 1 वर्ष के लिए आपने ₹100000 का लॉन्ग टर्म के लिए निवेश किया किंतु 1 वर्ष बाद आपकी पूंजी के अनुसार आपको रिटर्न नहीं मिला या बहुत ही कम रिटर्न मिला तो उसे नुकसान ही समझा जाता है

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